काम की बात बिजनेस

डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, जानें- आम लोगों पर क्या हो रहा है इसका असर

डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। इसके असर से हर जरूरत की चीज पर महंगाई की और मार पड़ेगी। वहीं जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि में रुपये की कमजोरी से निर्यात में इजाफा देखने को मिलेगा।

डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है. आज रुपया 11 पैसे टूटकर 78.96 रुपये पर खुला. इस साल के ऊपरी स्तर से रुपया 6% कमजोर हो चुका है. डॉलर की मजबूती लंबे समय से रुपये पर दबाव बनाए हुए है. डॉलर इंडेक्स में इस साल 8% से ज्यादा मजबूती दर्ज की गई है. US में ब्याज दरें बढ़ने से डॉलर में मजबूती बढ़ी है.

बीते कई महीने से डॉलर के मुकाबले रुपये की हालत पस्त है. 12 जनवरी 2022 को जहां डॉलर के मुकाबले रुपया 73.77 रुपये था वहीं ये मई में 4 रुपये गिरकर 77.72 रुपये पहुंच गया था. हालांकि, अप्रैल में यह थोड़ा मजबूत होता दिखा और डॉलर के मुकाबले 75.23 रुपये तक आ पहुंचा. लेकिन 5 अप्रैल के बाद से यह लगातार गिरता गया और अब अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया.

80 रुपये तक फिसलने का अनुमान 

डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का कारण विदेशी पूंजी की बाजार से सतत निकासी और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी है। तमाम जानकारों ने इसके 80 रुपये तक फिसलने का अनुमान लगाया है।बुधवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 78.86 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला।

रुपये में कमजोरी की वजह क्या है?

रूस-यूक्रेन युद्ध और यूएस फेड की सख्त मोनेटरी पॉलिसी से पैदा हुई वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण विदेशी निवेश के बाहर जाने से डॉलर की तुलना में रुपया कमजोर हो रहा है. रुपये की गिरावट की बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और डॉलर की सामान्य मजबूती भी है.

यूएस फेड द्वारा मोनेटरी पॉलिसी में सख्ती करने से पोर्टफोलियो निवेश भी लोगों ने निकाल लिया. 16 मई तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारत से 21.2 बिलियन डॉलर निकाल लिए. इससे भारतीय रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) पर भी अचानक दबाव पड़ा है.

रुपये में गिरावट का असर

रुपये में गिरावट से देश में आयात महंगा हो रहा है और मुद्रास्फीति बढ़ रही है जो कि पहले से ही RBI के 2-6 परसेंट के कंफर्ट जोन से बाहर है. इससे फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स मेटल और बैंकिंग जैसे सेक्टरों को नुकसान हो रहा है.

रुपये के कमजोर होने का सबसे बड़ा असर इंफ्लेशन पर पड़ता है क्योंकि भारत अपने कच्चे तेल का 80% से अधिक आयात करता है जो भारत का सबसे बड़ा आयात है. भारत उर्वरकों और खाद्य तेलों के लिए भी अन्य देशों पर बहुत अधिक निर्भर है.

कमजोर रुपये जहां आयात को महंगा बनाता है वहीं इसके कुछ फायदे भी होते हैं. यह निर्यातकों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाता है. लेकिन कमजोर वैश्विक मांग और निरंतर अस्थिरता के दौर में निर्यातक रुपये में गिरावट से खुश नहीं हैं.

फायदे में कौन?

हालांकि रुपये की गिरावट से कुछ सेक्टर को जहां नुकसान है वहीं आईटी , फार्मास्यूटिकल्स और टेक्सटाइल जैसे निर्यात ओरिएंटेड सेक्टर के लिए रुपये की गिरावट फायदे का सौदा हो सकता है क्योंकि कमजोर रुपये से निर्यात बढ़ सकता है.

भारत द्वारा निर्यात किए जाने वाले प्रमुख आइटमों जैसे रत्न, आभूषण, पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स, आर्गेनिक केमिकल्स और ऑटोमोबाइल और मशीनरी आइटम में आयात की मात्रा काफी अधिक है. अब आपूर्ति की कीम के कारण कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतकरी के साथ निर्यातकों के लिए प्रॉडक्शन की लागत बढ़ जाएगी और इसका सीधा असर उनके मार्जिन पर पड़ेगा. इसलिए इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे एक्सपोर्ट किए जाने आइटम जिनके निर्माण के लिए आयात किए जाने वाला पार्ट अधिक हैं उनमें लाभ की उम्मीद नहीं की जा सकती. हालांकि आईटी और श्रम आधारित कपड़ा जैसे उद्योगों को रुपये की गिरावट का लाभ मिल सकता है.

Avatar

Pooja Pandey

About Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Welcome to fivewsnews.com, your reliable source for breaking news, insightful analysis, and engaging stories from around the globe. we are committed to delivering accurate, unbiased, and timely information to our audience.

Latest Updates

Get Latest Updates and big deals

    Our expertise, as well as our passion for web design, sets us apart from other agencies.

    Fivewsnews @2024. All Rights Reserved.