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आटा के बाद अब चावल भी हुआ महंगा, सिर्फ पांच दिन में 10 फीसदी बढ़ें दाम, जानें- इसके पीछे की वजह

भारत में गेंहू के बाद चावल पर भी एक्सपोर्ट पर प्रतिबन्ध लग सकता है. भारत द्वारा चावल के निर्यात पर रोक लगाने के फैसले के डर से बांग्लादेश ने चावल आयात करने का निर्णय लिया है.

आम आदमी पर महंगाई की मार आटा के बाद अब चावल पर भी पड़ने वाली है. देश के कई राज्यों में चावल भी महंगा हो चुका है. यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल में चावल के दामों में 10 प्रतिशत तक तेजी आ गई है. आपको बता दें कि बांग्लादेश ने हाल ही में चावल पर आयात शुल्क में भारी कटौती करने का फैसला किया है. बांग्लादेश को डर है कि भारत गेहूं के बाद चावल के निर्यात पर भी रोक लगा सकता है. इसलिए बांग्लादेश चावल का घरेलू स्टॉक बढ़ाने के लिए भारत से आयात शुरू कर दिया है.

दरअसल, बांग्लादेश ने पिछले दिनों चावल पर इंपोर्ट ड्यूटी और टैरिफ को 62.5 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी कर दि. इससे पहले भारत ने पिछले महीने ही गेहूं के निर्यात पर अंकुश लगा दिया था, जिससे निर्यातकों ने आटे का निर्यात बढ़ा दिया. इसका परिणाम यह हुआ कि भारतीय बाजारों में आटा के दामों में भी तेजी आ गई. अब बांग्लादेश के इस फैसले के बाद चावल के दाम भी बढ़ गए हैं.

आटा के बाद चावल हुआ महंगा

इसका प्रभाव आगे दिखाई देने लगेगा. खासकर बासमती चावल के दाम में तेजी आ जाएगी. आपको बता दें कि बासमती चावल की सबसे लो क्‍वालिटी 1509 रुपये प्रति क्विंटल होता है, जिसका रेट इस बार 3000 रुपये प्रति क्विंटल से उपर खुला है. पिछले कई दिनों से यह कयास लगाया जा रहा था कि भारत गेंहू के बाद चावल के भी एक्सपोर्ट पर बैन लगा सकता है. भारत द्वारा चावल के निर्यात पर रोक लगाने के फैसले की डर से ही बांग्लादेश ने चावल आयात करने का निर्णय लिया है.

चावल के दामों में भारी उछाल

5 दिनों भारतीय गैर-बासमती चावल के दाम 350 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 360 डॉलर प्रति टन पर जा पहुंचा है. कई जानकारों का कहना है कि चावल के दाम 10 फीसदी तक बढ़ चुके हैं. पश्चिंम बंगाल, उत्तरप्रदेश और बिहार से चावल का बांग्लादेश में निर्यात किया जाता है. बांग्लादेश के इस निर्णय के बाद तो इन तीनों राज्यों में ही चावल के दाम 20 फीसदी तक बढ़ चुके हैं. दूसरे राज्यों में 10 फीसदी का इजाफा हुआ है. 2020-21 में बांग्लादेश ने 13.59 लाख टन चावल का आयात किया था. आंकड़ों के मुताबिक भारत ने 2021-22 में 6.11 बिलियन डॉलर का गैर-बासमती चावल निर्यात किया था. जबकि 2020-21 में 4.8 अरब डॉलर का चावल निर्यात किया गया था. चावल के ग्लोबल ट्रेड में भारत की हिस्सेदारी 40 फीसदी हैं.

बांग्लादेश के इस कदम से क्या असर होगा?

बांग्लादेश के इस फैसले का असर भारतीय बाजारों पर देखा जाने लगा है. बीते चार-पांच दिनों में ही भारतीय गैर-बासमती चावल के दाम 350 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 360 डॉलर प्रति टन पहुंच गया है. यूपी, बिहार, पं बंगाल के कई जगहों पर बांग्लादेश के इस निर्णय के बाद तो चावल के दाम 20 फीसदी तक बढ़ चुके हैं. वहीं, दूसरे राज्यों में 10 प्रतिशत तक उछाल देखने को मिल रहा है.

वहीं, केंद्र सरकार असमान्य निर्यात वृद्धि पर सतर्क हो गई है. 13 मई को केंद्र सरकार ने गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके बावजूद निर्यातकों के द्वारा हर महीने तकरीबन एक लाख टन आटा निर्यात किया जा रहा है. अगर यही हाल रहा तो चावल के दाम में भी और तेजी आ जाएगी.

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Pooja Pandey

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