दिल्ली में आज विपक्षी दलों की बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस समेत 17 दलों ने हिस्सा लिया। इसमें तय किया गया कि राष्ट्रपति चुनाव में एक उम्मीदवार मैदान में उतारा जाएगा, जिसे सभी समर्थन देंगे।

विपक्षी नेताओं ने आगामी राष्ट्रपति चुनाव में एक साझा उम्मीदवार को मैदान में उतारने का संकल्प लिया है। सुधींद्र कुलकर्णी ने कहा कि विपक्षी नेताओं ने आगामी राष्ट्रपति चुनाव में एक साझा उम्मीदवार को मैदान में उतारने के लिए एक प्रस्ताव अपनाया है। एक उम्मीदवार जो वास्तव में संविधान के संरक्षक के रूप में काम कर सकता है और मोदी सरकार को भारतीय लोकतंत्र और भारत के सामाजिक ताने-बाने को और नुकसान पहुंचाने से रोक सकता है।
टीएमसी नेता ममता बनर्जी ने कहा कि आज बैठक में कई पार्टियां थीं। हमने तय किया है कि हम केवल एक आम सहमति वाले उम्मीदवार को चुनेंगे। हर कोई इस उम्मीदवार को समर्थन देगा। हम दूसरों से सलाह मशविरा करेंगे। यह एक अच्छी शुरुआत है। हम कई महीनों के बाद एक साथ बैठे, और हम इसे फिर से करेंगे। इन सभी ने शरद पवार का नाम लिया। लेकिन उन्होंने मना कर दिया है। हमने उनसे परामर्श करने के लिए कहा है यदि फिर भी नहीं कहते हैं तो और चर्चा होगी।
DMK नेता टी आर बालू ने कहा कि सभी दलों ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार से राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष का उम्मीदवार बनने का अनुरोध किया, हालांकि, उन्होंने इनकार कर दिया। नेताओं ने मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी और शरद पवार से राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार के संबंध में दलों से चर्चा करने का अनुरोध किया।
फारूक अब्दुल्ला, गोपालकृष्ण गांधी के नाम का सुझाव दिया
आरएसपी नेता एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर फारूक अब्दुल्ला, गोपालकृष्ण गांधी के नाम का सुझाव दिया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्षी दलों को राष्ट्रपति चुनाव के लिए आम सहमति के साथ उम्मीदवार तक पहुंचाने में कांग्रेस रचनात्मक भूमिका निभाएगी। राष्ट्रपति पद के विपक्ष के उम्मीदवार को संविधान को बनाए रखने, धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने का संरक्षण करने, नफरत फैलाने वाली ताकतों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। खड़गे ने अन्य विपक्षी दलों से आम सहमति के उम्मीदवार पर पहुंचने के लिए प्रतिक्रियाशील होने के बजाय अग्रसक्रिय रहने को कहा।
पवार बोले- नाम पर रायशुमारी जारी
इससे पहले दिल्ली में ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्षी दलों की मीटिंग करीब दो घंटे तक चली। बैठक में ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर गांधी जी के पोते गोपाल गांधी और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला का नाम प्रपोज किया। इसके बाद शरद पवार ने भी कहा कि हम नाम पर रायशुमारी कर रहे हैं।
एक ही कैंडिडेट पर विपक्ष के नेता सहमत
बैठक में शिवसेना और कांग्रेस समेत 16 दल शामिल थे। आम राय यह बनी कि पूरे विपक्ष का एक ही कैंडिडेट होगा। इस बैठक में आम आदमी पार्टी ने हिस्सा नहीं लिया। उधर, न्योता न मिलने पर असदुद्दीन ओवैसी भी नाराज हो गए। इससे पहले मंगलवार को शरद पवार ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया।
ममता की मीटिंग में ये दल हुए शामिल
बैठक में कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एम), सीपीआईएमएल, आरएसपी, शिवसेना, एनसीपी, राजद, एसपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, जद (एस), डीएमके, आरएलडी, आईयूएमएल और झामुमो के लीडर्स शामिल हुए। इधर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रपति चुनाव को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ओडिसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से बात की है।
कौन हैं गोपालकृष्ण गांधी?
गोपालकृष्ण गांधी महात्मा गांधी के परपोते हैं। उनका जन्म 22 अप्रैल को 1945 को हुआ। पिता का नाम देवदास गांधी है। सी राजगोपालचारी उनके नाना थे। उन्होंने दिल्ली के स्टीफन कॉलेज से अंग्रेजी में मास्टर की डिग्री पूरी की। 77 साल के गोपाल गांधी 1968 से 1992 तक IAS अधिकारी के रूप में विदेशों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
रिटायरमेंट के बाद वे राजनीति में भी अपना हाथ आजमा चुके हैं। 2017 के उपराष्ट्रपति चुनाव में भी वे विपक्ष की ओर से उम्मीदवार थे, लेकिन चुनाव में एम वेंकैया नायडू से हार गए थे। इससे पहले 1997 में वे बंगाल के राज्यपाल के रूप में भी काम कर चुके हैं।
शरद पवार और खड़गे का भी नाम उछला
इससे पहले खबरें आ रही थीं कि विपक्षी दल राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए एनसीपी नेता शरद पवार के नाम पर सहमत नजर आ रहे हैं। शरद पवार से पहले कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को भी राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने की खबरें आ रही थीं।