राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को पूरा होने वाला है, ऐसे में भारत निर्वाचन आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव की तारीख की घोषणा कर दी है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को पूरा होने वाला है, ऐसे में भारत निर्वाचन आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव की तारीख की घोषणा कर दी है। गुरुवार को एक प्रेस वार्ता में मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो नए राष्ट्रपति के लिए चुनाव 18 जुलाई को होंगे। मतों की गिनती, यदि आवश्यक हो, 21 जुलाई को होगी।मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने आज मीडिया से कहा, “चुनाव आयोग भारत के राष्ट्रपति पद के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है
राष्ट्रपति चुनाव 2022 के बारे में आवश्यक तथ्य
अनुच्छेद 54 के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी सहित सभी राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य होते हैं।राज्यसभा और लोकसभा या राज्यों की विधानसभाओं के मनोनीत सदस्य निर्वाचक मंडल में शामिल होने के पात्र नहीं हैं और इसलिए, वे चुनाव में भाग लेने के हकदार नहीं हैं। इसी तरह, विधान परिषदों के सदस्य भी राष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक नहीं होते हैं। इस वर्ष के राष्ट्रपति चुनावों में, लगभग 4,809 सांसद, जिनमें 776 संसद सदस्य और 4,033 विधान सभा सदस्य शामिल हैं, भारत के नए राष्ट्रपति का चुनाव करेंगे।
कैसे होती है राष्ट्रपति पद के लिए वोटिंग
संविधान के अनुच्छेद 62 का संदर्भ देते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है और अगले राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए चुनाव उससे पहले संपन्न होना चाहिए. राष्ट्रपति चुनाव में संसद के दोनों सदनों के सदस्यों के अलावा सभी राज्य के विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और संघ शासित प्रदेश पुडुचेरी के विधानसभा के सदस्य वोट डाल सकते हैं.
776 सांसद और विधान सभा के 4120 विधायकों से निर्वाचन मंडल बनता है. कुल मूल्य 10,98,803 है. अपने उम्मीदवार को राष्ट्रपति बनवाने के लिए एनडीए को बीजेडी और वायएसरआरसी के समर्थन की आवश्यकता होगी.
कैसे चुनते हैं राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार
इस चुनाव में देश की जनता प्रत्यक्ष रूप से मतदान नहीं करती. जनता के द्वारा चुने गए सांसद और विधायक भी इस चुनाव में भाग लेते हैं. इन चुनावों में राज्यसभा सांसद, लोकसभा सांसद और विधायकों को वोट देने का अधिकार होता है. हालांकि, विधान पार्षदों और नामित व्यक्तियों को वोट करने का अधिकार नहीं होता.
राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान करते वक्त विधायक और सांसद अपने बैलेट पेपर पर अपना चुनाव करते हैं और इसमें वो अपनी पहली पसंद, दूसरी पसंद और तीसरी पसंद बता देते हैं. सबसे पहले पहली पसंद के वोट गिने जाते हैं. अगर पहली पसंद का उम्मीदवार जीत के लिए जरूरी वेटेज हासिल कर लेता है तो उसकी जीत हो जाती है वहीं अगर ऐसा नहीं होता तो दूसरी और फिर तीसरी पसंद के वोटों को गिना जाता है