प्रशांत किशोर की नीतीश कुमार से मिलने की अनिच्छा ने सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब वह अपने खुद के किसी भी राजनीतिक दल की घोषणा करने से मीलों दूर लगते हैं।

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के ट्वीट के बाद चर्चाएं जारी हैं। वहीं, खबर है कि वह दो दिनों से बिहार की राजधानी पटना में हैं, लेकिन अब तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात नहीं हो पाई है। कहा जा रहा है कि कभी जनता दल यूनाइटेड में कुमार के साथ काम कर चुके किशोर अब मुलाकात के लिए अनिच्छुक नजर आ रहे हैं और उनका ये रवैया कई सियासी सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, इसके भी कई कारण गिनाए जा रहे हैं।
खबरें आई थी कि किशोर और कुमार रविवार को मिलने की योजना बना रहे हैं। साथ ही यह भी कहा जा रहा था कि सीएम खुद बैठक का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन जब उन्हें पता चला कि किशोर की आने की संभावना नहीं हैं, तो वह पटना की सड़कों का निरीक्षण करने निकल पड़े। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य मंत्री नितिन नवीन और दूसरे अधिकारियों को बुलाया गया और पटना में सड़कों और पुलों का निरीक्षण तीन घंटों तक चला।
अब कारणों पर नजर डालते हैं
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दोनों की मुलाकात नहीं होने के कुछ कारण गिनाए गए हैं। पहला, उन्होंने कहा कि किशोर बैठक से इसलिए बच रहे थे, क्योंकि नीतीश कुमार ने अतीत में एक निजी मुलाकात को आधिकारिक बताने और फिर उसका इस्तेमाल भारतीय जनता पार्टी के साथ चर्चाओं में कर ‘भरोसा तोड़ा था।’
सूत्रों ने कहा कि किशोर उस दौरान ज्यादा नाराज हुए जब उन्होंने खुद को हाशिए पर पाया। यह बात पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के बाद की है, जिसमें अध्यक्ष की कुर्सी जदयू के छात्र समूह के खाते में आई थी। साफतौर से भाजपा का दबाव झेल रहे कुमार ने किशोर से जिम्मेदारियां वापस ली और यह सुनिश्चित किया कि 2019 चुनाव में वे दरकिनार किया जाए।
रिपोर्ट के अनुसार, नागरिकता संशोधन कानून पर दोनों के बीच असहमति भी अलग होने का कारण बनी। खास बात है कि कुमार सीएए का समर्थन कर रहे थे।
तीसरा, प्रशांत किशोर के करीबी सूत्र बताते हैं कि चुनावी रणनीतिकार को उस समय भी लगा कि उन्हें धोखा दिया गया है, जब कुमार सरकार को रिपोर्ट करने वाली पटना पुलिस ने साल 2020 में उनके खिलाफ कंटेंट चोरी के आरोपों को साबित करने के लिए प्रयास किए।
चौथा, सूत्रों का कहना है कि साल 2018 में जब कुमार और भाजपा के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा था, तब किशोर, नीतीश कुमार की ओर से राजद नेता लालू प्रसाद यादव के पास पहुंचे थे। लेकिन भाजपा नेतृत्व की तरफ से कमान संभालने का भरोसा मिलने के बाद सीएम ने अपने विचार बदल लिए थे।
सोमवार को पीके ने एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने ‘बिहार से शुरुआत’ की बात कही थी। इसके बाद से ही अटकलें लगने लगी थी कि किशोर अपनी पार्टी शुरू करने जा रहे हैं। इससे पहले पीके और कांग्रेस के बीच भी चर्चाओं का लंबा दौर चला, लेकिन अंत में बैठकें सफल नहीं हुई और किशोर ने पार्टी में शामिल होने का ऑफर ठुकरा दिया। इस बात की जानकारी चुनावी रणनीतिकार ने खुद ट्वीट के जरिए दी थी।