गुजरात में सरकारी स्कूल की गुणवत्ता के बारे में आम आदमी पार्टी की आलोचना के लिए परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए जीतू वाघाणी ने कहा कि गुजरात में रहे और पले-बढ़े लोग अब स्कूल की शिक्षा के मामले में अन्य राज्यों को बेहतर पाते हैं.

गुजरात के शिक्षा मंत्री जीतू वाघाणी ने बुधवार को कहा कि जिन लोगों को गुजरात के स्कूलों की शिक्षा पसंद नहीं है, उन्हें आलोचना करने के बजाए अपने बच्चों के प्रमाण-पत्र लेकर जिस राज्य या देश में जाना पसंद है, वहां चले जाना चाहिए. शिक्षा मंत्री राजकोट में एक स्कूल भवन का उद्घाटन करने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे. कार्यक्रम में कई स्कूल के छात्रों के अभिभावकों ने भाग लिया.
गुजरात में सरकारी स्कूल की गुणवत्ता के बारे में आम आदमी पार्टी (आप) की आलोचना के लिए परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात में रहे और पले-बढ़े लोग अब स्कूल की शिक्षा के मामले में अन्य राज्यों को बेहतर पाते हैं. वाघाणी ने कहा, ‘कुछ लोग गुजरात में रहे, यहीं पले-बढ़े, उनके बच्चे यहां पढ़े, उन्होंने यहां कारोबार किया…लेकिन अगर आपको कोई और राज्य या देश बेहतर लगे (स्कूल की शिक्षा के मामले में) तो अपने बच्चे का (स्कूल छोड़ने का) प्रमाण पत्र लेकर वहां चले जाएं.’
मंत्री ने कहा, ‘मैं विरोध करने की मानसिकता रखने वाले लोगों से कहना चाहता हूं कि अगर उन्हें लगता है कि यहां सब कुछ खराब है तो यहां एक पल के लिए भी इंतजार न करें.’ उन्होंने कहा कि शिक्षा में सुधार के उपाय सुझाए जा सकते हैं, लेकिन सरकारी स्कूल के बारे में ऐसा कुछ नहीं कहना चाहिए जिससे माता-पिता और छात्र बेबस महसूस करें.
दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने हाल में वाघाणी को गुजरात और दिल्ली की शिक्षा प्रणाली पर बहस के लिए चुनौती दी थी. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई ने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार की शिक्षा प्रणाली की आलोचना करने वाले कई ट्वीट किए थे जिसके बाद सिसोदिया ने यह चुनौती दी थी.