रूस-यूक्रेन संकट बातचीत और कूटनीति की जरूरत पर जोर देते हुए एस जयशंकर ने कहा कि खून बहाकर कोई समाधान नहीं निकाला जा सकता है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आज लोकसभा में यूक्रेन की स्थिति पर सदन को जानकारी देते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर किसी ने भी अपने नागरिकों को नहीं निकाला है। ऑपरेशन गंगा – यूक्रेन में फंसे नागरिकों के लिए भारत का निकासी मिशन – पर सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि यह भारत द्वारा किया गया सबसे चुनौतीपूर्ण निकासी था और अन्य देशों को प्रेरणा दे रहा है। उन्होंने कहा, “अगर चार केंद्रीय मंत्री यूक्रेन के पड़ोसी देशों में नहीं गए होते, तो भारत को समान स्तर का सहयोग नहीं मिलता। श्री जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से निकासी में निवेश किया था, और उन्होंने बैठकें कीं और चुनावों के बीच स्थिति की निगरानी की।
रूस और यूक्रेन के बीच जंग को 40 से ज्यादा दिन हो गए हैं. इस बीच यूक्रेन के बूचा शहर से युद्ध में नरसंहार की ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जिन्होंने पूरी दुनिया को हिला दिया है. यूक्रेन ने आरोप लगाया है कि रूसी सेना ने कीव के पास बूचा शहर में सामूहिक तौर पर कत्लेआम किया है बूचा नरसंहार की पूरी दुनिया निंदा कर रही है. बूचा की इस घटना पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लोकसभा में बयान दिया है.
क्या कहा विदेश मंत्री ने
लोकसभा में जानकारी देते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा- हम यूक्रेन से निकाले गए छात्रों के लिए शिक्षा जारी रखने के बारे में हंगरी, रोमानिया, चेक गणराज्य, कजाकिस्तान और पोलैंड के संपर्क में हैं क्योंकि उनके पास शिक्षा के समान मॉडल हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि यूक्रेन सरकार ने फैसला किया कि मेडिकल की पढ़ाई में शिक्षा पूरी करने के लिए छात्रों को छूट दी जाएगी। उन्होंने बताया कि तीसरे साल के मेडिकल छात्रों के लिए KROK 1 परीक्षा अगले एकेडमिक सेशन के लिए स्थगित कर दी गई।
लोकसभा में उन्होंने जानकारी दी है कि यूक्रेन सरकार ने निर्णय लिया है कि छात्रों को एसटीडी की अनिवार्यता के पूरा करने के लिए अगले एकेडमिक सेशन में पास करने की अनुमति होगी। वहीं, 6वें साल के स्टूडेंट्स को KROK-2 परीक्षा देनी है। शैक्षणिक मूल्यांकन के रिजल्ट के आधार पर छात्रों को बिना KROK लिए डिग्री दी जाएगी।
छूट भी मिलेगी
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि यूक्रेन की सरकार ने वापस लौटने वाले छात्रों को पढ़ाई में छूट देने का भी फैसला किया है। उन्होंने बताया कि तीसरे से चौथे ईयर में छात्रों को जाने के लिए वहां क्रॉक-1 परीक्षा होती है लेकिन इस बार उस परीक्षा को स्थगित कर दिया गया है। वहीं, उन्होंने एजुकेशन लोन के बारे में बताया कि यूक्रेन में पढ़ने वाले 1,319 छात्रों पर लोन है। इसके लिए भारत सरकार इस मसले पर सभी पक्षों के साथ बातचीत कर रही है। इस दौरान विदेश मंत्री ने भारतीय छात्रों की तारीफ भी की।