दण्ड प्रक्रिया पहचान विधेयक 2022 को लोकसभा में मंजूरी मिल गई है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि बिल किसी दुरुपयोग के लिए नहीं लाया गया है.

आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक, 2022 को लोकसभा से मंजूरी मिल गई है. इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि बिल किसी दुरुपयोग के लिए नहीं लाया गया है. किसी भी डेटा के दुरुपयोग की संभावना नहीं. उन्होंने कहा कि जो लोग मानव अधिकारों की चिंता कर रहे हैं, वह उन लोगों के भी मानवाधिकारों के चिंता करें, जो पीड़ित होते हैं. उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों का हवाला देने वालों को भी रेप पीड़ितों के मानवाधिकारों के बारे में सोचना चाहिए। वे (विपक्ष) केवल बलात्कारियों, लुटेरों की चिंता करते हैं, लेकिन केंद्र कानून का पालन करने वाले नागरिकों के मानवाधिकारों की चिंता करता है. इस बिल में आपराधिक मामलों में पहचान और जांच के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का प्रावधान है. लोकसभा में नियम 193 के तहत, खेलों की आवश्यकता और उन्हें बढ़ावा देने वाले कदमों की ओर ध्यानाकर्षण करने के लिए भी चर्चा की जाएगी. आज राज्यसभा के एजेंडे में सीएस कानून में संशोधन से संबंधित बिल पर विचार किया गया, साथ ही श्रम और रोजगार मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा की जानी थी, लेकिन ईंधन की कीमत में वृद्धि को लेकर विपक्ष ने हंगामा जारी रखा और राज्यसभा बार-बार स्थगित की गई. राज्यसभा में आज कोई कामकाज नहीं हो सका .
उन्होंने कहा कि यह विधेयक कैदियों की पहचान अधिनियम, 1920 की जगह लेगा। मौजूदा कानून मौजूदा स्थिति, विज्ञान, अदालतों में अपराध साबित करने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मजबूत करने जैसे विभिन्न दृष्टिकोणों को देखते हुए अप्रासंगिक हो गया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक न केवल वर्तमान कानून के तहत आने वाली समस्याओं को दूर करने में मदद करेगा बल्कि साक्ष्य एकत्र करने को भी ताकत देगा।
गृह मंत्री ने कहा कि जब तक अदालतों में अपराध साबित करने की शक्तियों को नहीं बढ़ाया जाता, एक तरह से कानून व्यवस्था की स्थिति और देश की आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखना और मजबूत करना असंभव होगा।
आपराधिक प्रक्रिया बिल लोकसभा से पास
आपराधिक प्रक्रिया बिल लोकसभा से पारित हो गया है. ये बिल पेश करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बिल किसी दुरुपयोग के लिए नहीं लाया गया है. किसी भी डेटा के दुरुपयोग की संभावना नहीं.
क्या है इस बिल में
इस बिल में गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति के निजी बायोलॉजिकल डाटा इकट्ठा करने की छूट देता है। इसमें पुलिस को अंगुलियों, पैरों, हथेलियों के निशान, रेटिना स्कैन, भौतिक, जैविक नमूने और उनके विश्लेषण, हस्ताक्षर, लिखावट या अन्य तरह का डाटा एकत्र करने की छूट होगी।
विरोधी दल इसे सरकार की जरूरत से ज्यादा निगरानी और निजता का हनन बता रहे हैं। अगर ये बिल कानून का रूप लेता है तो ये कैदियों की पहचान अधिनियम, 1920 की जगह लेगा। मौजूदा कानून केवल ऐसे कैदियों की सीमित जानकारी एकत्र करने की बात कहता है जो या तो दोषी करार हो चुके हैं या फिर सजा काट रहे हैं। इसमें भी केवल उंगलियों के निशान और पदचिह्न ही लिया जा सकता है।