केरल उच्च न्यायालय ने सरकार को राज्य सरकार के कर्मचारियों को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी भारत बंद में भाग लेने पर रोक लगाने का आदेश जारी करने का निर्देश दिया है।

सरकारी कर्मी 28 और 29 मार्च को काम का बहिष्कार कर रहे हैं. सेंट्रल ट्रेड यूनियन के संयुक्त मंच ने दो दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. हड़ताल से न सिर्फ केरल बल्कि और कई राज्यों में कई काम ठप पड़ गए हैं.यह बंद मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ बुलाया गया है। इस दौरान बैंकिंग, रोडवेज, बीमा और वित्तीय क्षेत्र पर इसका असर पडे़गा। ट्रेड यूनियनों द्वारा सोमवार यानी आज से दो दिवसीय हड़ताल के आह्वान का प्रभाव आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु और हरियाणा में दिख रहा है। यहां प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं। वहीं, इसका सबसे ज्यादा असर पश्चिम बंगाल और केरल में देखने को मिल रहा है। केरल में हाईकोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए सरकार को निर्देश भी जारी किया है।
हाईकोर्ट ने एलडीएफ सरकार को सोमवार को निर्देश जारी कर कहा कि वह दो दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दौरान अपने कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने से रोकने के लिए तत्काल निषेध आदेश जारी करे. मुख्य न्यायाधीश एस मणिकुमार और न्यायमूर्ति शाजी पी चले ने सीसी नायर एस की जनहित याचिका पर यह अंतरिम निर्देश जारी किए हैं. याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता सजीत कुमार वी ने आदेश की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि अदालत का मानना है कि सरकारी कर्मियों द्वारा हड़ताल करना अवैध है. क्योंकि उनकी सेवा शर्तों में ऐसा करना निषेध है.
सरकारी कर्मियों ने काम का किया बहिष्कार
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दावा किया कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को केंद्र सरकार के खिलाफ हड़ताल पर जाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है और दो दिन तक काम का बहिष्कार करने के दौरान उन्हें वेतन का भुगतान करेगी. सरकारी कर्मी 28 और 29 मार्च को काम का बहिष्कार कर रहे हैं. सेंट्रल ट्रेड यूनियन के संयुक्त मंच ने दो दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. हड़ताल से न सिर्फ केरल बल्कि और कई राज्यों में कई काम ठप पड़ गए हैं.
केरल में स्ट्राइक के चलते सभी संस्थान बंद रहे. राज्य द्वारा संचालित केरल राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें सड़कों से नदारत रहीं. टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और निजी बसें भी राज्यभर में नजर नहीं आईं. ट्रक और लॉरी सहित वाणिज्यिक वाहनों के संचालकों ने भी हड़ताल के प्रति एकजुटता व्यक्त की है. हड़ताल के दौरान हालांकि दूध, समाचार पत्र, अस्पताल, एम्बुलेंस सहित आवश्यक सेवाएं जारी रहीं. राज्य के विभिन्न हिस्सों से मिली खबरों के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर निजी कंपनियों के कर्मचारियों को कार्यालय जाने से रोकने की कोशिश की.
सरकार की गलत नीतियों के विरोध में प्रदर्शन
इस बीच, पुलिस ने क्षेत्रीय कैंसर केंद्र जाने के लिए तिरुवनंतपुरम सेंट्रल रेलवे स्टेशन पहुंचे लोगों के लिए परिवहन सेवाओं की व्यवस्था की. कर्मचारियों, किसानों और आम लोगों पर प्रतिकूल असर डालने वाली सरकार की कथित गलत नीतियों के विरोध में केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने दो दिवसीय राष्ट्रीय हड़ताल का आह्वान किया है, जो सोमवार से शुरू हुई. भारतीय मजदूर संघ को छोड़कर राज्य और देश के सभी कर्मचारी संघ हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं.