राजस्थान राज्य

कोटा में बन रही दुनिया की सबसे बड़ी घंटी,स्थानीय लोगों ने आलोचना करनी शुरू कर दी है

कोटा में रिवरफ्रंट परियोजना के हिस्से के रूप में चंबल नदी के तट पर बनने जा रही 82,000 किलोग्राम की झूलती घंटी को लेकर अब पर्यावरणविदों, स्थानीय लोगों और राजनेताओं ने आलोचना करनी शुरू कर दी है

राजस्थान के कोटा में चंबल रिवर फ्रंट पर पर बन रही दुनिया की सबसे बड़ी घंटी उद्घाटन से पहले ही विवादों में घिर गई है. कोटा में रिवरफ्रंट परियोजना के हिस्से के रूप में चंबल नदी के तट पर बनने जा रही 82,000 किलोग्राम की झूलती घंटी को लेकर अब पर्यावरणविदों, स्थानीय लोगों और राजनेताओं ने आलोचना करनी शुरू कर दी है. बता दें कि घंटी के निर्माण के साथ ही गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में 3 रिकार्ड इसके नाम दर्ज हो जाएंगे. 82000 किलो वजनी घंटी की गूंज 8 किलोमीटर दूर तक सुनाई देने का दावा किया गया है. इधर पर्यावरणविदों का आरोप है कि घंटी को बनाने के लिए कास्टिंग यूनिट, जो राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरएसपीसीबी) के तहत आता है वह बोर्ड की सहमति लिए बिना स्थापित किया गया है.

इसके अलावा, इकाई को राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य (एनसीएस) के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) में स्थापित किया गया है जिसके लिए नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ से अनिवार्य अनुमति भी नहीं ली गई है.

मानदंडों का सरेआम हुआ उल्लंघन

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय जल बिरादरी के राज्य उपाध्यक्ष बृजेश विजयवर्गीय का कहना है कि इकाई के नालों से पहले से ही जहरीला कचरा नदी में डाला जा रहा है. उन्होंने कहा कि घंटी को बनाने के लिए सांचे में धातु डालने से यहां प्रदूषण होगा. वहीं यहां मानदंडों का उल्लंघन करते हुए एक फाउंड्री और बॉयलर स्थापित किए जाएंगे.

इसके अलावा भारी धातु के कचरे को नदी में छोड़ा जाएगा जो न केवल चंबल नदी को प्रदूषित करेगा बल्कि यहां के पारिस्थितिकी तंत्र के बिगाड़ देगा. विजयवर्गीय ने आरोप लगाया कि सरकार प्रदूषित नदी का इलाज करने के बजाय यहां सौंदर्यीकरण के नाम पर पैसा बर्बाद कर रही है. एक अनुमान के मुताबिक घंटी बनाने के लिए 225 ट्रक रेत, पांच ट्रक सोडियम सिलिकेट, 12 ट्रक कार्बन डाइऑक्साइड, तीन ट्रक एलपीजी और 20,000 लीटर डीजल का इस्तेमाल होने की संभावना है.

ध्वनि प्रदूषण का भी है खतरा

वहीं घंटी की अनुमानित लागत 15-18 करोड़ रुपये बताई जा रही है जिसका इसका वजन कुल 8.2 टन होगा. घंटी की चौड़ाई 35 फीट और ऊंचाई 34 फीट होगी. इंजीनियरों ने दावा किया कि यह एक प्लेटफॉर्म पर जमीन से 70 फीट की ऊंचाई पर लटकी होगी जिसके नीचे करीब 400 लोग खड़े हो सकेंगे.

वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि घंटी की गूंज 8 किमी की दूरी तक सुनाई देग जिसके लिए लोगों का कहना है कि इससे ध्वनि प्रदूषण पैदा होगा और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले निवासियों को परेशानी होगी. इस मामले पर कोटा दक्षिण के विधायक संदीप शर्मा का कहना है कि यह परियोजना ना केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि नदी के किनारे को सुंदर बनाने के लिए जनता की मेहनत की कमाई को भी बर्बाद कर रही है, जिसकी आवश्यकता नहीं है.

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Pooja Pandey

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