भगवंत मान संसद में अपने हस्तक्षेप के दौरान निडर और व्यापक होते थे. उन्होंने सांसद के रूप में अपने पहले कार्यकाल में 107 बहसों में हस्तक्षेप किया, जो राज्य के 49 वाद-विवाद के औसत से दोगुना और एक सांसद के राष्ट्रीय औसत से 40 प्रतिशत अधिक था.

पंजाब में मेरा पहला परिचय भगवंत मान से ही हुआ था. बेशक, दिल्ली में पंजाबियों की अच्छी खासी आबादी है और उनमें से कई मेरे अच्छे दोस्त हैं. लेकिन पंजाबी की जो खासियत और अनोखापन है उनका वे वास्तव में प्रतिनिधित्व नहीं करते थे. मेरे प्राइमरी स्कूल एपीजे शेख सराय के स्कूल बस चालक, जो भगवंत मान के कैसेट सुना करते थे, ने मुझे उनकी व्यंग्य प्रतिभा से परिचित कराया. हमारे ड्राइवर साहब काफी मेहरबान थे जो हमारे लिए मान के सामग्रियों का अनुवाद और संदर्भ समझाने का काम कर देते थे. पांचवीं कक्षा के हम छह छात्र उनके सामने बैठते थे और वे भारत में सरकार और राजनीति की व्यवस्था पर भगवंत मान के व्यंग्य का आनंद लेते हुए अनुवाद करते थे.
भगवंत मान पंजाब के लिए एक स्पष्ट और व्यवहारिक विकल्प हैं
पिछली बार की तरह, कांग्रेस, अकाली और बीजेपी ने आप पर अपने हमले तेज किए. बदनाम करने वाले बयानों, दुर्भावनापूर्ण और गलत सूचना के प्रचार के साथ उन्होंने अपने हमले को बरकरार रखा. चार दशकों से कांग्रेस और अकाली दल ने पंजाब के नागरिकों को “संगठित और कानूनी तरीके से लूटा” – अगर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के भाषण से इस वाक्यांश का इस्तेमाल करें तो. बादल परिवार ने हरेक क्षेत्र में परिवार संचालित एकाधिकार बना रखा था और सार्वजनिक क्षत्रों को जमींदोज तो किया ही साथ ही पंजाब के युवाओं को नशे की लत लगा दिया. कैप्टन अमरिंदर सिंह एक राजा की तरह बर्ताव करते थे जिनकी सुशासन या नागरिक-केंद्रित नीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी. वे केवल अपने स्वार्थ पर केंद्रित थे.