यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद चीन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम ने गेंहू के आयात से प्रतिबंध हटाने की घोषणा कर दी.

यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से दुनिया के कई देश रूस से खार खाए हुए हैं और तरह-तरह के प्रतिबंध लगा रहे हैं. एक ओर जहां विश्व का अधिकतर धड़ा मास्को के आक्रामक रवैये के खिलाफ है, तो वहीं दूसरी ओर चीन रूस के पक्ष में खड़ा नजर आ रहा है. यही कारण है कि इसनें रूस पर लगे सभी गेहूं आयात के प्रतिबंधों को हटाने का फैसला लिया है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने बताया कि चीन अब रूसी गेहूं की डिलीवरी के लिए पूरी तरह से खुला है. क्योंकि आयात पर से सभी प्रतिबंध हटा लिए गए हैं. चीन द्वारा उठाया गया यह कदम रूस की अर्थव्यवस्था को लाइफलाइन प्रदान कर सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि यूरोपीय संघ और अमेरिका ने रूस पर कई तरह के कठिन आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं. इस कदम से चीन की फूड सिक्योरिटी को भी बढ़ावा मिलेगा. इस महीने की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बीजिंग यात्रा के दौरान चीन रूस से आयात की अनुमति देने पर सहमत हुआ था. यूक्रेन में युद्ध की वजह से बीते हफ्ते गेहूं की वैश्विक स्तर पर कीमतों में बड़ा उछाल देखा गया.
इस युद्ध से दुनिया में फूड सप्लाई चेन होगी प्रभावित
रूसस को दुनिया का शीर्ष गेहूं निर्यातक माना जाता है. जबकि यूक्रेन को ‘यूरोप का ब्रेडबैकेट’ कहा जाता है. दोनों के पास वैश्विक गेहूं निर्यात का लगभग एक तिहाई हिस्सा हैं. ऐसे में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से पूरी दुनिया में फूड सप्लाई चेन प्रभावित या फिर बाधित हो सकती है. बता दें कि चीन ने यूक्रेन में छिड़े युद्ध के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराने से साफ इनकार किया. हालांकि बीजिंग ने इस मसले पर दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है. चीन ने संयुक्त राज्य अमेरिका पर आरोप लगाया कि युद्ध की आग भड़काने का काम अमेरिका ने किया है.
चीन ने अमेरिका पर लगाया आरोप
चीन ने यूक्रेन संकट के लिए अमेरिका पर डर और दहशत पैदा करने का आरोप लगाया है. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता चुनयिंग ने कहा कि बीजिंग रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ है और इसका विरोध करता है. चुनयिंग ने कहा कि यूक्रेन बॉर्डर के आसपास रूसी आर्मी की तैनाती और हिंसक युद्ध की संभावना को लेकर अमेरिका यूक्रेन को हथियार देकर स्थिति को और गंभीर बनाने की कोशिश कर रहा है.