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सबसे बड़े लोन घोटाले में एबीजी शिपयार्ड के पूर्व चेयरमैन से सीबीआई ने की पूछताछ

देश के सबसे बड़े बैंक घोटाले (22,848 करोड़) मामले में एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ऋषि अग्रवाल से सीबीआई ने पूछताछ की है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। हालांकि अधिकारियों ने यह जानकारी नहीं दी कि अग्रवाल से कभी पूछताछ की गई। उनका बस इतना कहना है कि उनसे हाल ही में पूछताछ हुई।

भारत के अब तक के सबसे बड़े माने जा रहे कर्ज घोटाले में जांच एजेंसियों ने प्रमुख लोगों से पूछताछ तेज कर दी है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आज सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन यानि सीबीआई ने एबीजी शिपयार्ड के पूर्व चेयरमैन से पूछताछ की.सूत्रों के मुताबिक कंपनी के पूर्व चेयरमैन और एमडी ऋषि अग्रवाल से लोन घोटाले के मामले में लंबी पूछताछ की गई है. सूत्रों ने जानकारी दी कि सीबीआई ने शनिवार को पूर्व चेयरमैन के घर पर तलाशी ली थी जिसके बाद उन्हे पूछताछ के लिये बुलाया गया. फ्रॉड मामले में ईडी ने कल ही मामला दर्ज किया है. ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है. ये पूरा लोन घोटाला करीब 23 हजार करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया है.

ईडी ने दर्ज किया मनी लॉन्ड्रिंग का मामला

मामले में बुधवार को ईडी ने एबीजी शिपयार्ड के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर लिया है. सीबीआई पहले ही कंपनी और उसके अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर चुकी है. ये मामला करीब 23 हजार करोड़ रुपये का है. जिसमें बैंकों के एक समूह के साथ धोखाधड़ी किये जाने का आरोप है. सीबीआई सूत्रों के मुताबिक कंपनी ने अपनी करीब 100 सहयोगी कंपनियों में रकम को छुपाया है जिसका पता लगाने के लिये जांच तेज गई है. खबरों के मुताबिक सीबीआई अदालत में केस फाइल करने से पहले अपने दावों की मजबूती के लिये सभी कदम उठा रही हैं जिससे वो मामले की सुनवाई के दौरान पक्ष को मजबूती से रख सके . इससे पहले शनिवार को सीबीआई ने देश के सबसे बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड और उसके तत्कालीन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ऋषि कमलेश अग्रवाल सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. अधिकारियों ने शनिवार को कहा था कि यह मुकदमा भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई वाले बैंकों के एक संघ से कथित रूप से 22,842 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के संबंध में दर्ज किया गया. एजेंसी ने अग्रवाल के अलावा तत्कालीन कार्यकारी निदेशक संथानम मुथास्वामी, निदेशकों – अश्विनी कुमार, सुशील कुमार अग्रवाल और रवि विमल नेवेतिया और एक अन्य कंपनी एबीजी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी कथित रूप से आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आधिकारिक दुरुपयोग जैसे अपराधों के लिए मुकदमा दर्ज किया. अधिकारियों के मुताबिक इन लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा किया गया है.

क्या है पूरा मामला

बैंकों के संघ ने सबसे पहले आठ नवंबर 2019 को शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर सीबीआई ने 12 मार्च 2020 को स्पष्टीकरण मांगा था. बैंकों के संघ ने उस साल अगस्त में एक नई शिकायत दर्ज की और डेढ़ साल से अधिक समय तक जांच करने के बाद सीबीआई ने इस पर कार्रवाई की. सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि फॉरेंसिक ऑडिट से पता चला है कि वर्ष 2012-17 के बीच आरोपियों ने कथित रूप से मिलीभगत की और अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया, जिसमें धन का दुरुपयोग और आपराधिक विश्वासघात शामिल है. यह सीबीआई द्वारा दर्ज सबसे बड़ा बैंक धोखाधड़ी का मामला है. वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है एबीजी शिपयार्ड का खाता पिछली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल में एनपीए हुआ था और बैंकों ने औसत से कम समय में इसे पकड़ा और अब इस मामले में कार्रवाई चल रही है. यह मामला भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई वाले बैंकों के एक संघ से कथित रूप से 22,842 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी से जुड़ा है जिसकी जांच सीबीआई कर रही है. और अब इसमें ईडी भी शामिल हो गई है.

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Pooja Pandey

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