देश और दुनिया में कोरोना महामारी कमजोर पड़ रही है। जिंदगी पटरी पर लौट रही है कि एक और खतरे की आहट सुनाई दे रही है। ताजा खबर ब्रिटेन से आ रही है। यहां लासा बुखार के तीन केस सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।

ब्रिटेन में लासा बुखार के तीन मामले सामने आए हैं. इनमें से एक की मौत हो चुकी है. तीनों मरीजों का कनेक्शन उनकी पश्चिमी अफ्रीकी देशों की यात्रा से जोड़ा जा रहा है. यह एक वायरस के जरिए फैलने वाली बीमारी है, इसलिए इसे लासा वायरस के नाम से भी जाना जाता है. इसका पहला मामला 1969 में नाइजीरिया के लासा नगर में सामने आया था, इसलिए इस बीमारी का नाम लासा रखा गया था. सबसे पहले लासा फीवर से दो नर्सों की मौत हुई थी. इसके बाद दुनिया के कई देशों में इसके मामले सामने आए.
क्या है लासा फीवर और यह कैसे फैलता है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, लासा फीवर एक वायरस से होने वाली बीमारी है. जो चूहों के जरिए फैलती है. लासा वायरस से संक्रमित चूहे के मल-मूत्र या खाने की चीजों को संक्रमित करने पर यह बीमारी इंसानों तक पहुंच सकती है. पश्चिम अफ्रीका के कई देशों में चूहों की जनसंख्या अधिक है. इसलिए यहां मामले भी ज्यादा हैं.
पश्चिम अफ्रीका के देशों में यह बीमारी एंडमिक स्टेज में है, जिसका मतलब है लोग अब इस बीमारी के साथ रहना सीख गए हैं. इनमें बेनिन, घाना, टोगो, सिएरा लियोन, लाइबेरिया, माली, नाइजीरिया और गिनी जैसे देश शामिल हैं.
कौन से लक्षण दिखते ही अलर्ट हो जाएं?
रिपोर्ट कहती है, इसके 80 फीसदी मरीजों में लक्षण नहीं नजर आते हैं, लेकिन बुखार, थकान, सिरदर्द, कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर अलर्ट हो जाएं. इसके अलावा उल्टी, चेहरे में सूजन, ब्लीडिंग, छाती, पीठ और पेट में दर्द संक्रमण के गंभीर लक्षण हैं. संक्रमण के बाद वायरस का असर दिखने में 2 से 21 दिन का समय लग सकता है.
इससे मौत का खतरा कितना है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, लासा वायरस का संक्रमण होने पर मौत का खतरा 1 फीसदी तक रहता है. हालांकि गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा रिस्क जोन में हैं. संक्रमण के 80 फीसदी मामलों में कोई लक्षण नहीं दिखते हैं. इसलिए वायरस का पता नहीं चल पाता है. शुरुआती दौर में इलाज न होने पर मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती कराने की नौबत आ सकती है. इलाज न मिलने पर जान का जोखिम बढ़ता है.
लासा वायरस से संक्रमित होने वाले हर 5 में से 1 मरीज की हालत गंभीर हो सकती है. यह वायरस मरीज के लिवर, स्प्लिन और किडनी पर वार करता है.