कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिजाब मामले में आज दोपहर 2.30 बजे से फिर सुनवाई शुरू हुई। कल इस मामले पर याचिकाकर्ता छात्राओं की ओर से पेश वकील देवदत्त कामत ने दलीलें पेश की थीं। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका और तुर्की के कानूनों का हवाला दिया था। वहीं आज छात्राओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रविवर्मा कुमार ने कर्नाटक शिक्षा अधिनियम का हवाला दिया।

कर्नाटक हाईकोर्ट में शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हो गई है. मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश ऋतुराज अवस्थी की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि हस्तक्षेप आवेदन पर विचार करने का प्रश्न कहां है? यह एक रिट याचिका है न कि जनहित याचिका इस तरह के आवेदन न्यायालय का समय बर्बाद करेंगे और हमें प्रथम दृष्टया लगता है कि वे अनुरक्षण योग्य नहीं हैं. इस पर एक महिला अधिकार संगठन की ओर से वकील शादान फरासत ने कहा कि आधिपत्य हम पर समय सीमा लगा सकता है. मैं इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय कानून और दायित्वों को प्रस्तुत करने जा रहा हूं. मुझे यकीन है कि कोई और इस पर बहस नहीं कर रहा है. कृपया समय सीमा लागू करें, लेकिन हमें बाहर न करें.
वहीं, प्रोफेसर रविवर्मा कुमार ने याचिकाकर्ताओं की ओर से अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि मैं कर्नाटक शिक्षा अधिनियम के प्रावधानों को दिखा रहा हूं. कृपया 1995 के नियमों पर आएं. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता कर रहे हैं, अगर हमें लगता है कि हमें और मदद की जरूरत है तो हम इसके लिए कहेंगे. वह नियम 11 का जिक्र कर रहे हैं जो कपड़े, किताबों आदि के प्रावधानों से संबंधित है. इसके बाद कुमार नियम 11 को पढ़ते हैं. कुमार ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अगर स्कूल वर्दी (ड्रेस कोड) बदलना चाहता है तो उसे एक साल पहले माता-पिता को नोटिस जारी करना होगा. अगर हिजाब पर बैन है तो उसे एक साल पहले सूचित करना चाहिए था. कुमार ने कहा कि नियमों के तहत अभिभावक-शिक्षक समिति बनाना अनिवार्य है.
किस नियम के तहत छात्राओं को कक्षा से बाहर रखा गया- सीनियर एडवोकेट कुमार
सीनियर एडवोकेट प्रोफेसर रविवर्मा कुमार ने कोर्ट में कहा कि हिजाब पर कोई पाबंदी नहीं है और सवाल यह उठता है कि किस अधिकार या नियम के तहत छात्राओं को कक्षा से बाहर रखा गया. कुमार ने आगे कहा कि सरकार अकेले हिजाब क्यों चुन रही है. चूड़ी पहने हिंदू लड़कियों और क्रॉस पहनने वाली ईसाई लड़कियों को क्लास से बाहर क्यों नहीं भेजा जाता है. वरिष्ठ अधिवक्ता प्रोफेसर रविवर्मा कुमार ने कहा कि क्या आप छात्रों के कल्याण को किसी राजनीतिक दल या राजनीतिक विचारधारा को सौंप सकते हैं? वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, कॉलेज विकास समिति के पास छात्रों के खिलाफ पुलिस जैसे अधिकार नहीं हो सकते हैं. बता दें कि मंगलवार को स्कूलों में हिजाब पहनी छात्राओं को क्लास से बाहर कर दिया गया था. जिसके बाद उनके माता-पिता ने स्कूल में जमकर हंगामा किया था.
वहीं, प्रोफेसर रविवर्मा कुमार ने याचिकाकर्ताओं की ओर से अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि मैं कर्नाटक शिक्षा अधिनियम के प्रावधानों को दिखा रहा हूं. कृपया 1995 के नियमों पर आएं. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता कर रहे हैं, अगर हमें लगता है कि हमें और मदद की जरूरत है तो हम इसके लिए कहेंगे. वह नियम 11 का जिक्र कर रहे हैं जो कपड़े, किताबों आदि के प्रावधानों से संबंधित है. इसके बाद कुमार नियम 11 को पढ़ते हैं. कुमार ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अगर स्कूल वर्दी (ड्रेस कोड) बदलना चाहता है तो उसे एक साल पहले माता-पिता को नोटिस जारी करना होगा. अगर हिजाब पर बैन है तो उसे एक साल पहले सूचित करना चाहिए था. कुमार ने कहा कि नियमों के तहत अभिभावक-शिक्षक समिति बनाना अनिवार्य है.
किस नियम के तहत छात्राओं को कक्षा से बाहर रखा गया- सीनियर एडवोकेट कुमार
सीनियर एडवोकेट प्रोफेसर रविवर्मा कुमार ने कोर्ट में कहा कि हिजाब पर कोई पाबंदी नहीं है और सवाल यह उठता है कि किस अधिकार या नियम के तहत छात्राओं को कक्षा से बाहर रखा गया. कुमार ने आगे कहा कि सरकार अकेले हिजाब क्यों चुन रही है. चूड़ी पहने हिंदू लड़कियों और क्रॉस पहनने वाली ईसाई लड़कियों को क्लास से बाहर क्यों नहीं भेजा जाता है. वरिष्ठ अधिवक्ता प्रोफेसर रविवर्मा कुमार ने कहा कि क्या आप छात्रों के कल्याण को किसी राजनीतिक दल या राजनीतिक विचारधारा को सौंप सकते हैं? वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, कॉलेज विकास समिति के पास छात्रों के खिलाफ पुलिस जैसे अधिकार नहीं हो सकते हैं. बता दें कि मंगलवार को स्कूलों में हिजाब पहनी छात्राओं को क्लास से बाहर कर दिया गया था. जिसके बाद उनके माता-पिता ने स्कूल में जमकर हंगामा किया था.