क्रिकेट खेल

पिता के अधूरे सपने को बेटा करेगा पूरा, 6 साल की उम्र में ही पहचान ली थी प्रतिभा, अब आईपीएल में मचाएगा तहलका!

ये तेज गेंदबाज तेजी से गेंद फेंकने के साथ-साथ गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की काबिलियत रखता है और इसी कारण टीमों ने उन पर दांव खेला.

आईपीएल ने कई खिलाड़ियों को करोड़पति बनाया है. यश दयाल इस लिस्ट में नया नाम हैं. उत्तर प्रदेश का ये खिलाड़ी आईपीएल-2022 मेगा नीलामी में फ्रेंचाइजियों की नजरों में रहा. नतीजा ये रहा कि 10 लाख की बेस प्राइस वाले यश को 16 गुना ज्यादा में नई टीम गुजरात टाइटंस ने अपने नाम किया है. यश को उम्मीद नहीं थी कि वह बिकेंगे. वह इस समय गुड़गांव मं हैं जहां उनकी टीम रणजी ट्रॉफी से पहले क्वारंटीन में हैं. यश आईपीएल नीलामी देख रहे थे लेकिन उनका नाम नहीं आ रहा था तो वह टीवी बंद करके और मोबाइल फोन को साइलेंट करके सो गए थे.

यश की जब नींद खुली तो उनका फोन मिस्ड कॉल्स, मैसेज से भरा पड़ा था. उन्होंने जब फोन उठाया तो उनके पिता चंद्रपाल दयाल के 20 मिस्ड कॉल थे. यश ने जब अपने पिता को फोन किया तब उन्हें पता चला कि उनका आईपीएल में चुन लिया गया है और गुजरात ने उन्हें 3.2 करोड़ रुपये में खरीद कर करोड़पति बना दिया है.

फोन नहीं उठा रहा था तो पिता हो गए थे परेशान

यश के पिता जब उनको फोन कर रहे थे और वो फोन नहीं उठा रहे थे तो उनको पिता परेशान हो गए थे. चंद्रपाल ने  कहा, “हम इस बात को लेकर चिंतित थे कि वह फोन क्यों नहीं उठा रहा है. मैंने जब उसको नीलामी के बारे में बताया तो उसे लगा कि मैं उसे पागल बना रहा हूं. उसकी टीम का कोई भी खिलाड़ी उसके कमरे में नहीं गया क्योंकि कोविड प्रोटोकॉल्स के कारण वह इधर-उधर घूम नहीं सकते.”

यश ने विजय हजारे ट्रॉफी में दमदार प्रदर्शन किया था. सात मैचों में इस गेंदबाज ने 3.77 की इकॉनमी रेट से 14 विकेट लिए थे. यश के जिस प्रतिभा के सभी कायल बने हैं वो गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की काबिलियत है और वह 140 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से ये करते हैं.

तेज गेंदें फेंकना पसंद

उनके पिता ने बताया कि यश को तेज गेंदें फेंकना पसंद हैं. उन्होंने कहा, “उन्हें तेज गेंदें फेंकना पसंद है. वह तेज हैं लेकिन अनियमित नहीं. वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकता है. उसके पास बेहतरीन बाउंसर हैं और वह यॉर्कर गेंदें हैं.”

यश के पिता भी तेज गेंदबाज रहे हैं और विजी ट्रॉफी खेले हैं. उन्हें हालांकि अपने पिता से सपोर्ट नहीं मिला लेकिन वह अपने बेटे को पूरा सपोर्ट दे रहे हैं ताकि वह राष्ट्रीय टीम से खेल सके और वो काम कर सके जो वो नहीं कर पाए. उन्होंने कहा, “मुझे कभी अपने पिता से समर्थन नहीं मिला. बल्कि मेरे पिता हमेशा कहा करते थे कि क्रिकेट में कोई भविष्य नहीं है. मैं अपना समय बर्बाद कर रहा हूं और मुझे परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए.”

छह साल की उम्र में पहचानी प्रतिभा

चंद्रपाल ने छह साल की उम्र में अपने बच्चे की प्रतिभा को पहचान लिया था. उन्होंने कहा, “मुझे जो सबसे हैरानी वाली बात जो लगी थी वो उसका बाएं हाथ से गेंद फेंकना और वो तेज गेंदबाज बना, ये मेरे लिए हैरानी भरा रहा.”

12 साल की उम्र में उनके पिता ने यश को मदन मोहन मालविय स्टेडियम में ले गए और वहां से यश के क्रिकेटर बनने की शुरुआत हुई. इसी मैदान पर यश के पिता ने भी पसीना बहाया था. यश ने सितंबर-2018 में डेब्यू किया था अभी तक 12 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं. इसके अलावा 14 लिस्ट-ए मैचों में हिस्सा लिया है. वह उत्तर प्रदेश के लिए 15 टी20 मैच खेल चुके हैं.

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Pooja Pandey

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