चुनाव आयोग ने मणिपुर में दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों में फेरबदल किया है. अब यहां 28 फरवरी और 5 मार्च को मतदान होगा. जबकि इससे पहले 27 फरवरी और 3 मार्च की तारीख चुनाव के लिए तय की गई थी.

मणिपुर विधानसभा चुनाव में पहले चरण (28 फरवरी) के मतदान के लिए 38 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव अधिकारियों ने 175 उम्मीदवारों के नामांकन पत्र को मंजूरी दी है. शुक्रवार को उम्मीदवारी वापस लेने की आखिरी तारीख है. अधिकारियों ने बताया कि इंफाल पूर्वी जिले के 10 विधानसभा सीटों के लिए मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह (हिंगांग सीट) सहित कुल 45 उम्मीदवार हैं. जबकि इंफाल पश्चिम जिले की 13 विधानसभा सीटों से नामांकन भरने वाले 56 उम्मीदवारों में विधानसभा अध्यक्ष वाई खेमचंद (सिंगजामेई सीट) और उपमुख्यमंत्री वाई जॉयकुमार (उरीपोक सीट) शामिल हैं.
बिष्णुपुर जिले में 6 विधानसभा सीटों के लिए 22 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है. चुराचांदपुर जिले की 6 विधानसभा सीटों से 34 और कांगपोकपी जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों से 18 उम्मीदवार मैदान में हैं. मणिपुर विधानसभा में 60 सीटों पर चुनाव प्रस्तावित हैं. यहां दो चरणों में चुनाव होंगे. जबकि वोटों की गिनती 10 मार्च को होगी. इस बीच, चुनाव आयोग ने मणिपुर में दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों में फेरबदल किया है. अब यहां 28 फरवरी और 5 मार्च को मतदान होगा. जबकि इससे पहले 27 फरवरी और 3 मार्च की तारीख चुनाव के लिए तय की गई थी.
पंजाब में भी हुआ था चुनाव की तारीखों में बदलाव
चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा कि यह फैसला सूचनाओं, अभ्यावेदन, पूर्व की नजीर, साजो-सामान, जमीनी स्थितियों और इस मामले में सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर आधारित है. आयोग ने हाल में पंजाब में भी विधानसभा चुनावों की तारीख में बदलाव करते हुए इसे 14 फरवरी से 20 फरवरी कर दिया था. यह फैसला राज्य सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा की गई मांग के बाद किया गया था.
उग्रवादी गुटों को मतदान करने की इजाजत
इस बीच, चुनाव आयोग ने मणिपुर के उग्रवादी गुटों को विधानसभा चुनाव में पोस्टल बैलेट के जरिए मतदान करने की इजाजत दी है. ये वो उग्रवादी हैं, जिन्होंने सरकार से सीजफायर का समझौता किया है. साथ ही इनके नाम वोटिंग लिस्ट में भी हैं. हालांकि आयोग ने इसके लिए कई तरह की शर्तें भी रखी हैं. चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि इन मतदाताओं को उनके मताधिकार के अधिकार को ध्यान में रखते हुए पोस्टल बैलेट के माध्यम से वोटिंग करने की परमिशन दी जाएगी, क्योंकि इन्हें कैंप्स से बाहर नहीं लाया जा सकता है. सरकार कई संगठनों से जुड़े लोगों को मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रही है. उम्मीद की जा रही है कि आगे भी कई उग्रवादी संगठन सरकार से हाथ मिला सकते हैं.