सेक्शन 80सी की लिमिट में कई सालों से बदलाव नहीं किया गया है. अभी इस सेक्शन के तहत मौजूदा छूट की सीमा 1.5 लाख रुपये है. बचत दर में लगातार गिरावट को देखते हुए इसमें बढ़ोतरी की जा सकती है.

आज से ठीक दो दिन बाद यानि 1 फरवरी, 2022 को देश का बजट पेश किया जाएगा. भयंकर महंगाई से जूझ रहे देश के निम्न और मध्यम वर्ग को इस बजट से काफी उम्मीदें हैं. इसके साथ ही उच्च वर्ग भी बजट से काफी आस लगाए बैठा है कि उन्हें सरकार से कुछ मदद मिलेगी. लिहाजा, 1 फरवरी को संसद में पेश होने वाले बजट 2022-23 पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सरकार, देश की आम जनता को इस महंगाई से थोड़ी बहुत राहत दे सकती है, जिससे उनका जीवन आसानी से आगे बढ़ता रहे और उन्हें किसी तरह की विकट परिस्थितियों का सामना न करना पड़े.
सरकार इस बजट में एक आम जनता को 5 क्षेत्रों में राहत दे सकती है. आइए जानते हैं.
1. बेसिक छूट लिमिट
सरकार ने आखिरी बार 2014-15 के बजट में बेसिक छूट लिमिट में संशोधन किया था. इसमें सभी वर्गों के टैक्स दाताओं को 2.5 लाख रुपये तक की छूट दी गई थी. इसके अलावा, 60-80 साल तक के बुजुर्गों के लिए 3 लाख रुपये और 80 साल से ऊपर के बुजुर्गों के लिए 5 लाख रुपये तक की छूट दी गई थी.
अगर इस सीमा में बढ़ोतरी की जाती है तो इससे देश की आम जनता को राहत तो मिलेगी ही, इसके साथ ही इनकम टैक्स रिटर्न भरने का बोझ भी कम होगा.
2. टैक्स स्लैब में संशोधन
मौजूदा महंगाई को देखते हुए एडजस्टमेंट के लिए उच्चतम आय दर 10 लाख रुपये से कम है. माइग्रेशन को बढ़ावा देने के लिए नई व्यवस्था को और आकर्षक बनाया जा सकता है.
3. वित्तीय बचत के लिए प्रोत्साहन
सेक्शन 80सी की लिमिट में कई सालों से बदलाव नहीं किया गया है और इसमें गैर-बचत आइटम जैसे ट्यूशन फीस और हाउसिंग लोन मूलधन का भुगतान शामिल हैं. अभी इस सेक्शन के तहत मौजूदा छूट की सीमा 1.5 लाख रुपये है. बचत दर में लगातार गिरावट को देखते हुए इसमें बढ़ोतरी की जा सकती है.
4. होम लोन पर ब्याज छूट
बीते कई सालों से होम लोन की ब्याज दरों में संशोधन नहीं किया गया है, जबकि घरों की औसत कीमतों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है. अभी ब्याज चुकौती 2 लाख रुपये है. मूलधन चुकौती 1.5 लाख रुपये (80C सीमा 1.5 लाख रुपये में शामिल) है. इंडस्ट्री चाहती है कि ब्याज छूट की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक की जाए.
5. स्टैंडर्ड डिडक्शन
स्टैंडर्ड डिडक्शन को वित्त वर्ष 2019 में फिर से शुरू किया गया था और इसमें परिवहन भत्ता और मेडिकल रिम्बर्समेंट शामिल है. FY19 रु 40,000 FY20 (अंतरिम) रुपये 50,000
वर्क फ्रॉम होम के कारण बढ़े हुए खर्च के अलावा परिवहन और दवाओं की अधिक लागत को देखते हुए इसमें बढ़ोतरी की जा सकती है.
इसके साथ ही स्वास्थ्य बीमा के लिए सेक्शन 80डी में छूट दी जा सकती है. वर्तमान में इसकी लिमिट 25,000 रु है. कोविड को देखते हुए स्वास्थ्य बीमा के प्रीमियम में बीमा पर 18 फीसदी जीएसटी लगाई जाती है, जिसे 5 फीसदी तक किया जा सकता है.