सुरफशार्क के सीईओ बताते हैं कि लोग कोई भी ऐप इंस्टॉल करते हैं तो शुरुआत में उनसे डेटा शेयरिंग को लेकर परमिशन लिया जाता है. ऐप इजाजत लेता है कि आपके किन डेटाज को वह पढ़ना या उपयोग कर सकता है.

दिल्ली-एनसीआर समेत देश के बड़े शहरों में रहते हैं तो आप कहीं जाने-आने के लिए उबर, ओला या रैपिडो जैसी सर्विसेस तो यूज करते ही होंगे. इनके अलावा ग्रैबटैक्सी और यांडेक्स गो कंपनियां भी मार्केट में हैं, जो आपको ऑन डिमांड ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा देती है. इन कंपनियों के ऐप्स में आप अपना नाम, पता वगैरह डालते हैं. आप कहां जाते, आते हैं, इसकी भी खबर इन ऐप्स को होती है. ये कंपनियां अपने मोबाइल ऐप के जरिए आपका नाम, पता, मोबाइल नंबर समेत कई तरह की जानकारियां अपने पास जमा करती हैं.
एक यूजर के तौर पर आपको यह बताया जाता है कि आपके द्वारा दी गई जानकारियों के जरिए आपको बेहतर सर्विस देने में मदद मिलती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये कंपनियां आपकी पर्सनल जानकारियों का क्या करती हैं? एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि आपकी पर्सनल जानकारियां इन कंपनियों के लिए ऐसे डेटा के तौर पर जमा हो जाती हैं, जिसके बदले में इन्हें अच्छे पैसे मिलते हैं.
डेटा कलेक्ट करने में माहिर हैं ये कंपनियां
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर सिक्योरिटी कंपनी सुरफशार्क की एक स्टडी में यह जानकारी सामने आई ई कि ये कंपनियां अपने ग्राहकों के डेटा कलेक्ट करने में माहिर होती हैं. खासकर ग्रैबटैक्सी, यांडेक्स गो और उबर सबसे ज्यादा डेटा कलेक्ट करती हैं. ओला भी डेटा कलेक्ट करने में छठे स्थान पर है. हालांकि रैपिडो इस मामले में थोड़ी कम है. ग्रैबटैक्सी की तुलना में रैपिडो अपने ग्राहकों की जानकारियां 10 गुना कम कलेक्ट करती है. वहीं, टैक्सीईयू सबसे कम डेटा कलेक्ट करने वाली राइड हेलिंग कंपनी है.
आपकी हर गतिविधि पर नजर!
इस स्टडी में बताया गया है कि मोबाइल ऐप्स के माध्यम से कंपनियां आपकी बहुत सारी गतिविधियों पर नजर रखती हैं. टैक्सीईयू और रैपिडो जैसी कंपनियां ऐप के क्रैश होने, परफॉर्मेंस, यूजेज जैसे डेटा कलेक्ट करती हैं. वहीं लीकैब इनके आपके एड्रेस, लोकेशन और ईमेल आईडी जैसी जानकारियां भी स्टोर करती है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि कुछ कंपनियां तो आपकी ढेर सारी गतिविधियों पर नजर रखती है. जैसे कि आप कौन सी वेबसाइट्स विजिट करते हैं और आप किस तरह पेमेंट करते हैं. ऐसे डेटा ऐड कंपनियों के लिए बड़े काम की होती हैं.
आपके डेटा का क्या करती हैं कंपनियां?
ये अहम सवाल है कि आपकी पर्सनल जानकारियां का ये कंपनियां करती क्या हैं? जवाब ये है कि कंपनियां आपलोगों से कलेक्ट की गई जानकारियां थर्ड पार्टीज को बेच देती हैं. ये थर्ड पार्टीज ऐसी कंपनियां होती हैं, जो ऐड के लिए डेटा का इस्तेमाल करती हैं. आप जिस चीज के बारे में सोच रहे होते हैं, सर्च कर चुके होते हैं, आपको आपके मोबाइल पर उसी चीज की ऐड दिख जाती है तो आश्चर्य होता होगा न! चौंकने वाली बात नहीं है. ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि उन कंपनियों के पास पहले से ही आपका डेटा होता है.
क्या-क्या इंफॉर्मेशन बेचती हैं कंपनियां?
सुरफशार्क के सीईओ व्यतौतास काज़िउकोनि के मुताबिक, इस स्टडी में जिन 30 राइड हेलिंग ऐप्स को शामिल किया गया, उनमें से 9 कंपनियां ऐसी मिलीं जो यूजर्स की जानकारियां थर्ड पार्टी एडवर्टाइजिंग के लिए बेच देती हैं. इनमें यूजर्स के नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल वगैरह शामिल हैं. उबर और लिफ्ट जैसे कुछ ऐप तो नस्ल, जाति, सेक्सुअल झुकाव, चाइल्डबर्थ इंफॉर्मेशन और बायोमीट्रिक डेटा तक भी कलेक्ट करते हैं.
कैसे किया जा सकता है बचाव?
सुरफशार्क के सीईओ बताते हैं कि लोग कोई भी ऐप इंस्टॉल करते हैं तो शुरुआत में उनसे डेटा शेयरिंग को लेकर परमिशन लिया जाता है. ऐप इजाजत लेता है कि आपके किन डेटाज को वह पढ़ना या उपयोग कर सकता है. आप आरामतलबी के कारण बिना वार्निंग पढ़े ठीक है करते चले जाते हैं और अपना पर्सनल डेटा ऐप्स को कलेक्ट करने की इजाजत दे बैठते हैं.
हर चीज की परमिशन न देकर आप परेशानियों से बच सकते हैं. जैसे राइड हेलिंग ऐप्स है, तो आप केवल उससे लोकेशन शेयर कर सकते हैं और इंटरनेट इस्तेमाल करने की इजाजत दे सकते हैं, लेकिन कॉन्टैक्ट्स, फोन मेमोरी, स्टोरेज वगैरह रीड करने की इजाजत क्यों देंगे?
काज़िउकोनि बताते हैं कि ऐप्स को संवेदनशील डेटा कलेक्ट करने का परमिशन देकर आप जोखिम बढ़ा लेते हैं. सर्विस के बदले उनके पर्सनल डिटेल्स, फिजिकल एड्रेस तक थर्ड पार्टी के पास पहुंच जाता है. आप किन लिंक्स पर क्लिक कर रहे, कौन सी वेबसाइट विजिट कर रहे.. सारी जानकारी थर्ड पार्टी के पास जा रही होती है. इसलिए किसी भी ऐप को परमिशन देते समय सावधानी बरतें.