इरडा के पूर्व मेंबर निलेश साठे इस बारे में कहते हैं, इंश्योरेंस सेक्टर द्वारा स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर 18% जीएसटी में कमी लाने की मांग की गई थी. बीमा प्रीमियम पर 18% जीएसटी (वस्तु और सेवा कर) लगाना एक तरह से अत्याचार है.

बस हफ्ते भर बाद बजट आने वाला है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी. कोरोना महामारी को देखते हुए उम्मीद है कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को ‘बूस्टर डोज’ देगी. आगामी बजट से स्वास्थ्य क्षेत्र खासकर इंश्योरेंस सेक्टर को कई उम्मीदें लगी हैं. इस सेक्टर की मांग है कि कोरोना में लोगों का जीवन सुरक्षित बनाने के लिए बीमा का बहुत बड़ा रोल है. सरकार को बीमा क्षेत्र को बढ़ावा देना चाहिए. इसके लिए सरकार बजट में हेल्थ इंश्योरेंस पर सेक्शन 80D के तहत मिलने वाली 25000 रुपये की टैक्स छूट को 1.5 लाख तक कर दे तो अच्छा प्रोत्साहन मिलेगा. बीमा खरीदने पर 18 परसेंट का जीएसटी देना होता है जिसे घटाकर 5 परसेंट किए जाने की मांग की जा रही है.
सेक्शन 80D के तहत लाइफ इंश्योरेंस लेने वाले अकेले व्यक्ति को या किसी परिवार को या बच्चे की पॉलिसी पर 25,000 रुपये की टैक्स बचाने में मदद मिलती है. अगर वही पॉलिसी माता-पिता के लिए लेते हैं तो उस पर 50,000 रुपये की टैक्स छूट मिलती है. अगर पॉलिसी लेने वाला व्यक्ति जिसकी उम्र 60 साल से कम है या परिवार के लिए वही व्यक्ति पॉलिसी लेता है तो खुद की पॉलिसी, परिवार की पॉलिसी या बच्चे की पॉलिसी पर 25,000 रुपये की छूट मिलती है. 60 साल से ज्यादा उम्र के माता-पिता हों तो 75,000 रुपये की छूट मिलती है.
अभी कितनी मिलती है टैक्स छूट
अगर पॉलिसी लेने वाला व्यक्ति और उसके माता-पिता भी 60 साल से अधिक उम्र के हों तो सेक्शन 80D के तहत 1 लाख तक की छूट मिलती है. हेल्थ इंश्योरेंस अधिक से अधिक लोग ले सकें, इसके लिए छूट की राशि को 1.5 लाख तक बढ़ाए जाने की मांग की जा रही है.
इंश्योरेंस सेक्टर बहुत पहले से लाइफ इंश्योरेंस पर लगने वाले जीएसटी को घटाने की मांग कर रहा है. कोरोना महामारी को देखते हुए इस सेक्टर की मांग है कि अभी इंश्योरेंस खरीदने पर ग्राहक को 18 परसेंट जीएसटी देना होता है. अगर जीएसटी की दर को 5 परसेंट कर दिया जाएगा तो पॉलिसी कुछ सस्ती होगी और अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा पाएंगे.
सरकार का जवाब
लोकसभा में भी यह मुद्दा उठ चुका है जिस पर सरकार ने जवाब दिया है. लोकसभा में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री भगवत कराड ने कहा कि इंश्योरेंस पर 18 परसेंट जीएसटी का फैसला जीएसटी काउंसिल ने लिया है. जीएसटी काउंसिल में राज्यों और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि शामिल होते हैं. कराड ने लोकसभा में बताया था कि सरकार को जीएसटी घटाने की सिफारिश नहीं मिली है. जीएसटी काउंसिल भी यह दर घटाने पर विचार नहीं कर रही है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
इरडा के पूर्व मेंबर निलेश साठे इस बारे में कहते हैं, इंश्योरेंस सेक्टर द्वारा स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर 18% जीएसटी में कमी लाने की मांग की गई थी. बीमा प्रीमियम पर 18% जीएसटी (वस्तु और सेवा कर) लगाना एक तरह से अत्याचार है. वे कहते हैं, किसी भी सामाजिक सुरक्षा के अभाव में लोगों के लिए बीमा एक आवश्यकता फैक्टर बन जाता है. सभी आवश्यक वस्तुएं जीएसटी के दायरे से बाहर हैं, फिर प्रीमियम पर टैक्स क्यों लगाया जाना चाहिए, और वह भी इतना भारी.
इसी तरह की राय एलआईसी अध्यक्ष एमआर कुमार भी अपने एक मीडिया इंटरव्यू में दे चुके हैं. कुमार के मुताबिक बीमा पर 18 परसेंट जीएसटी बहुत ज्यादा है. बीमा तब और अधिक उपयोगी हो सकता है जब उसके जीएसटी रेट में कमी की जाए. कोविड में हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम महंगा होने के बाद जीएसटी घटाने की मांग और भी तेज हो गई है.