यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में आईसीयू में फ्लू के मामलों की संख्या में इजाफा देखने को मिला.

यूरोप में एक साथ दो महामारियों ने चिंता बढ़ा दी है और इसे ‘ट्विंडेमिक’ कहा गया है. दरअसल, कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के बीच इंफ्लूएंजा ने यूरोप में फिर से दस्तक दे दी है. ऐसी स्थिति की वजह से पहले से ही दबाव में चल रहे हेल्थ सिस्टम पर अधिक दबाव बढ़ने वाला है. पिछली सर्दियों में ये माना गया कि कोविड की वजह से फ्लू अस्थायी रूप से खत्म हो गया है. फ्लू ऐसी बीमारी है, जिसकी वजह से हर साल दुनियाभर में 6,50,000 लोगों की मौत होती है. हालांकि, पिछले साल ही अंत में इस बात से किनारा कर लिया गया, क्योंकि फ्लू वायरस यूरोप में उम्मीद से ज्यादा तेज से फैलने लगा. यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में आईसीयू में फ्लू के मामलों की संख्या में इजाफा देखने को मिला. साल के अंतिम सप्ताह में कम से कम 43 लोग आईसीयू में भर्ती थे. इन्फ्लूएंजा पर ECDC के शीर्ष विशेषज्ञ पासी पेंटिनन ने कहा, अगर हम सभी उपायों को उठाना शुरू कर देते हैं, तो मुझे इंफ्लूएंजा को लेकर बड़ी चिंता है, क्योंकि यूरोपीय आबादी
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ओमिक्रॉन को लेकर दी चेतावनी
फ्रांसीसी स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, पेरिस सहित फ्रांस के तीन क्षेत्र फ्लू महामारी का सामना कर रहे हैं. अधिकारियों ने खुलासा किया कि फ्रांस ने 6,00,000 से 6,50,000 मुर्गियां, बत्तख और अन्य मुर्गों को मार डाला है. ये सभी घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है, जब यूरोप पहले से ही कोरोनावायरस के घातक ओमिक्रॉन वेरिएंट का सामना कर रहा है. हाल ही में, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि अगले दो महीनों में यूरोप में आधे से अधिक लोग कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट के चपेट में आने वाले हैं.
कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे कई देश
विश्व स्वास्थ्य संगठन के यूरोपीय कार्यालय के स्थानीय डायरेक्टर हांस क्लूज ने कहा, ‘इस दर पर, इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन का अनुमान है कि अगले छह से आठ हफ्तों में इस क्षेत्र की 50 फीसदी से अधिक आबादी ओमीक्रॉन से संक्रमित हो जाएगी.’ वहीं, कई यूरोपीय देशों में अस्पतालों और आवश्यक सेवाओं में कर्मचारियों की कमी से जूझना पड़ रहा है. यहां पर ओमिक्रॉन के केस में इजाफा हो रहा है और इस वजह से हेल्थ कर्मचारी भी संक्रमित हो रहे हैं.