मध्य प्रदेश के किसानों ने 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मांगा फसल नुकसान का मुआवजा. सरकार दे रही है 30 हजार. किसानों का कहना है कि इसी रेट पर 2018 में मिला था मुआवजा, अब बढ़ चुकी है लागत.

मध्य प्रदेश के कई जिलों में ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने गेहूं, सरसों और चना आदि की फसलों को तबाह कर दिया है. राज्य सरकार ने फसल नुकसान से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए मुआवजे की घोषणा की है, लेकिन इस रकम पर विवाद शुरू हो गया है. सीएम ने वहां प्रति हेक्टेयर 30 हजार रुपये की राहत राशि का एलान किया है. जबकि किसान 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की मांग कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि सरकार मुआवजे की जो रकम इस साल देने को कह रही है, उतनी तो 2018 में ही मिल चुकी है. तब से अब तक अलग-अलग फसलों की लागत डेढ़ से दोगुनी हो चुकी है, फिर मुआवजा चार साल पुराने रेट पर क्यों?
किसान सत्याग्रह के नेता शिवम बघेल का कहना है कि 10 से 13 फरवरी 2018 तक मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में ओलावृष्टि हुई थी. इससे फसलों को नुकसान पहुंचा था. तब सरकार ने रेवेन्यू बुक सर्कुलर की धारा 6 की उपधारा 4 (RBC-6/4) के तहत राहत 30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर दी थी. चार साल में विभिन्न फसलों की लागत डेढ़ से दो गुनी हो चुकी है, लेकिन सरकार 2022 में भी मुआवजा पुराने रेट पर ही दे रही है. बघेल का कहना है कि 2018 में राहत राशि 30 हजार रु प्रति हेक्टेयर मिली थी तो अब चार साल बाद 2022 में 50 हजार रुपये हेक्टेयर क्यों नहीं मिलना चाहिये?
इस तरह बढ़ी फसल उत्पादन की लागत
बघेल का कहना है कि मध्य प्रदेश में इस साल ज्यादातर किसानों ने ब्लैक में खाद खरीदा है. यहां 267 रुपये वाली यूरिया औसतन 400 में लाइन में लगाकर खरीदनी पड़ी है. जबकि 1200 रुपये प्रति बोरी वाली डीएपी 1800 में खरीदा है. इसी तरह डीजल 110 रुपये प्रति लीटर तक के दाम पर खरीदा गया है. ऐसे में कोई भी व्यक्ति आसानी से अंदाजा लगा सकता है कि रबी फसलों की बुवाई कितनी महंगी रही है. साल 2018 से अब तक वैसे भी महंगाई काफी बढ़ी चुकी है. ऐसे में मुआवजे का पुराना रेट देना ठीक नहीं.
इस साल किन जिलों में हुआ नुकसान
मध्य प्रदेश इस साल ओलावृष्टि से काफी प्रभावित हुआ है. यहां 7 से 11 जनवरी से तक अलग-अलग क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई है. राजस्थान से सटे जिलों जैसे आगर मालवा, मंदसौर एवं रतलाम में 7 जनवरी को ओले पड़े थे. जबकि 8 से 11 जनवरी तक विदिशा, भोपाल, होशांगाबाद, हरदा, रायसेन, सागर, दमोह, जबलपुर, शिवनी एवं छिंदवाड़ा आदि के अलग-अलग क्षेत्र में ओलावृष्टि हुई थी.