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सुप्रीम कोर्ट ने तोड़ दी लैंगिक असमानता की सीमाएं

इस साल सुप्रीम कोर्ट ने एक और रिकॉर्ड बनाया. देश के चीफ जस्टिस एनवी रमणा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अलग-अलग हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के रूप में आठ जजों की पदोन्नति की सिफारिश की.

साल 2021 में तमाम बदलाव देखे गए. इनमें से सुप्रीम कोर्टके वे कदम भी रहे, जिनमें न्यायालय ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में लैंगिक असमानता की सीमाओं के पार जाते हुए नए आयाम तय किए. 24 महीने से ज्यादा वक्त के बाद अगस्त 2021 में नौ जजों को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया. इनमें आठ न्यायाधीश हाईकोर्ट से थे और एक सीनियर एडवोकेट को प्रोन्नति मिली. सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार इतने जजों के नाम नियुक्ति के लिए तय किए गए. इन नौ जजों में तीन महिला न्यायाधीश जस्टिस हिमा कोहली, जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस बीवी नागरत्ना थीं. इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में महिला जजों की संख्या चार हो गई है, जो अब तक के इतिहास में सबसे ज्यादा है.

इन नियुक्तियों में सबसे अहम जस्टिस बीवी नागरत्ना की नियुक्ति थी, जो 2027 में देश की पहली महिला चीफ जस्टिस बनेंगी. भले ही वह महज तीन महीने के लिए इस जिम्मेदारी को संभालेंगी, लेकिन उनकी नियुक्ति भारतीय न्याय व्यवस्था में महिला जजों के लिए चली आ रहीं रूढ़ियों को तोड़ देगी.

पहली बार दिल्ली हाईकोर्ट को मिलेगा एक समलैंगिक जज

एक और ऐतिहासिक घटनाक्रम का जिक्र करें तो सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने नवंबर 2021 के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए समलैंगिक वकील सौरभ कृपाल के नाम की सिफारिश की. यह LGBTQ समुदाय के लोगों को जज बनाने के उच्च न्यायपालिका की रूढ़िवादी मानसिकता को तोड़ने का एक और कदम साबित हुआ.

सौरभ कृपाल देश के पूर्व चीफ जस्टिस बीएन कृपाल के बेटे हैं. उन्हें हाईकोर्ट का जज बनाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के कॉलेजियम द्वारा 2017 में प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन इस संबंध में फैसला बार-बार टाला जाता रहा. लेकिन इस साल की शुरुआत में देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे ने इस संबंध में सरकार को पत्र लिखा. इसके माध्यम से यह जानने की कोशिश की गई कि क्या सरकार को एडवोकेट कृपाल की पदोन्नति पर कोई आपत्ति है? साथ ही, इस मामले को लेकर वे सभी जानकारियां मांगी गईं, जो सरकार के पास हो सकती हैं. आखिरकार नवंबर में सुप्रीम कोर्ट के टॉप-तीन जज इस पर सहमत हो गए और कृपाल का नाम दिल्ली हाईकोर्ट के जज के तौर पर नियुक्ति के लिए भेज दिया गया.

63 नामों को मिली मंजूरी

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इलाहाबाद, राजस्थान, कलकत्ता, झारखंड, केरल, मद्रास, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब एंड हरियाणा, गुवाहाटी और छत्तीसगढ़ के उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति के लिए 63 नामों को मंजूरी देने का अभूतपूर्व कदम उठाया. इस साल सुप्रीम कोर्ट ने एक और रिकॉर्ड बनाया. देश के चीफ जस्टिस एनवी रमणा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अलग-अलग हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के रूप में आठ जजों की पदोन्नति की सिफारिश की.

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Pooja Pandey

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